पंचर तंत्र

रविवार, 13 जुलाई 2008

गौ और गंगा


गौ ,गायत्री ,गीता ,और गंगा ये चार भारतीय संस्कृति के आधार स्तम्भ कहलाते हैं । सदियों से भारतीय जनजीवन पर प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है । लेकिन वर्त्तमान समय में गौ और गंगा दोनों ही अपनी महत्ता को खोते दिखाई पड़ रहे है । प्रदूषित होती गंगा तथा सड़क पर आवारा घूमते गायों का झुंड अपने बदहाली की दास्तान बयान करते है । गंगा की वास्तविक स्तिथि करोड़ों रुपयों की योजनाओ को मुहं चिढाती प्रतीत होती है । समय समय पर प्राप्त होने वाली गौवध की खबरें इंसान के मानसिक स्तर को स्वयं प्रकट कर देती है । परमात्मा की सत्ता का साक्षात्कार कर पाना आम इंसान के लिए कठिन है ,लेकिन इस सत्ता का अंश जो गौ और गंगा के रूप में आज भी विद्यमान है उससे जान बूझ कर वंचित होना कहाँ की समझदारी है ?यह तो मात्र मनुष्य के अध्यात्मिक समर्पण पर प्रश्न चिन्ह लगाता है । इतना कुछ जानने तथा समझने बाद भी आज तक पावन गंगा और माँ समान गौ को बचाने के प्रयत्न न किए जाने के पीछे क्या कारण है ?,यह इंसान के अलावा शायद सभी जानते होंगे ।
posted by ॐβĤĂV¥Åॐ at 10:29 am

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