पंचर तंत्र

बुधवार, 7 मई 2008

अंहकार

अंहकार हमारा गुप्त शत्रु है । महाभारत के शकुनी की तरह वह हमारा दोस्त होने का दिखावा करता है ;पर हमारी जानकारी के बिना हमें पतन की ओर ले जाता है । हम एक प्रकट शत्रु से भीड़ सकते हैं। लेकिन एक गुप्त ,अंजान शत्रु को को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल है । अंहकार नमक, यह निराकार शत्रु , हमारी प्रगति को रोकता है , या काफी हद तक कुथित कर देता है। अहंकारिक मनोभाव, दूसरो मी अच्छे गुंड देखने की , दूसरो की क्षमता का आदर करने की , या उनकी सफलताओं पर उनका अभिनन्दन करने की इजाजत नही देता । वह ज्यादातर लोगों को विनाश की ओर ले जाता है। वह हमें दूसरो के साथ-सामंजस्य से रहने से और उनकी अभिरुचि की क़द्र करने से रोकता है। "जो दूसरो के सामने झुकते हैं, उनकी हानि कभी नही होती। " - हम इस कहावत को भी न भूलें ।
posted by ॐβĤĂV¥Åॐ at 10:05 pm

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