पंचर तंत्र

सोमवार, 12 मई 2008

माँ




माँ, सुना दो मुझे वो कहानी,


जिसमे राजा न हो, न हो रानी,


जो हमारी तुम्हारी कथा हो,


जो सभी के ह्रदय की व्यथा हो ,


जिसमे सच की भरी चांदनी हो ,


जिसमे उम्मीद की रौशनी हो ,


हो न परियों की कहानी सुहानी ,


माँ सुना दो मुझे वो कहानी ।

posted by ॐβĤĂV¥Åॐ at 12:18 am 4 comments

शुक्रवार, 9 मई 2008


अगर देखना चाहते हो मेरी उड़ान को,

तो और ऊँचा कर दो अपने आसमान को ।
posted by ॐβĤĂV¥Åॐ at 11:46 pm 2 comments

बुधवार, 7 मई 2008

अंहकार

अंहकार हमारा गुप्त शत्रु है । महाभारत के शकुनी की तरह वह हमारा दोस्त होने का दिखावा करता है ;पर हमारी जानकारी के बिना हमें पतन की ओर ले जाता है । हम एक प्रकट शत्रु से भीड़ सकते हैं। लेकिन एक गुप्त ,अंजान शत्रु को को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल है । अंहकार नमक, यह निराकार शत्रु , हमारी प्रगति को रोकता है , या काफी हद तक कुथित कर देता है। अहंकारिक मनोभाव, दूसरो मी अच्छे गुंड देखने की , दूसरो की क्षमता का आदर करने की , या उनकी सफलताओं पर उनका अभिनन्दन करने की इजाजत नही देता । वह ज्यादातर लोगों को विनाश की ओर ले जाता है। वह हमें दूसरो के साथ-सामंजस्य से रहने से और उनकी अभिरुचि की क़द्र करने से रोकता है। "जो दूसरो के सामने झुकते हैं, उनकी हानि कभी नही होती। " - हम इस कहावत को भी न भूलें ।
posted by ॐβĤĂV¥Åॐ at 10:05 pm 0 comments

मंगलवार, 6 मई 2008

अंधा बाँटे रेवड़ी

एक पुरानी कहावत है कि अंधा बाँटे रेवड़ी अपने-अपने को देय, यह कहावत फिल्मी और टीवी के पुरस्कारों के मामले में हर तरह से फिट बैठती है। हर साल की तरह अपने ही घर और परिवार में खुद ही अवार्ड बाँटने का स्टार का सालाना जलसा फिर होने वाला है। कहा जा रहा है कि स्टार परिवार नाम के इस समारोह में इस बार चैनल ने अपने नामांकनों में एक नया शगूफा, नया सदस्य नाम का अवार्ड भी शामिल किया है। बाकी तो सास बहू-बेटा, बहन-भाई और ना जाने जाने क्या वाले अवार्ड तो है हीं। स्टार के संकीर्तन कहते हैं दरअसल, यह अपने ही घर में किसी को सम्मान और स्वीकृति देने वाला अवार्ड समारोह जैसा है और इसकी सबको जरूरत होती है।
posted by ॐβĤĂV¥Åॐ at 11:25 pm 0 comments